गुरुवार, 16 दिसंबर 2010


                                                 
बीकानेर की स्थापना व माँ करणीमाता

बीकानेर कि स्थापना विक्रम संवत 1543 में राव बीका ने शनिवार के दिन अक्षय दि्तीया को कि थी|गुजरात में जुनागढ़ शहर का नाम है मगर बीकानेर में किले का नाम जूनागढ है| बीकानेर के छठे शाशक राजा रायसिंह ने 17 फरवरी 1589 को इसका निर्माण कार्य आरभ्भ करवाया था|यह छः बषौ में बनकर पूर्ण हुआ|इसके बाद की सोलह पीढीयो के शाशकों ने इसका विकास करवाया|इसके भीतरी भाग में बने महल उन राजाओं की कला प्रियता के साक्ष है|
यह किला 40 फुट ऊंची तथा 14.5 फुट चौडी विशाल दीवारों से घिरा है|
जुनागढ में प्रवेश के लिए पूर्व में कर्ण पोल व पश्चिम में सिंह पोल बनें हुएं है|अब कर्ण पोल से प्रवेश किया जा सकता है|दोनों ही विशाल द्धारो के फाटक लोहे की जंगी कीलों से लैस है जिन्हें तोडना असभंव था|
महलों की और जाने के लिए सुरज पोल से प्रवेश करना होता है जो जैसलमेरी पीले पत्थर से बना है व इस राजा 360 फुट गहरा रामसर कुंआ है महाराजा गंगासिंह इसी कंए का पानी पीते थे तथा विदेश में भी यही पानी लेकर जाते थे|
बीकानेर से करीबन 30 क.म.दुर देशनोक गा्म में करणीमाता का मंन्दिर बना हुआ है जो कि चुहो का मंन्दिर के नाम से विश्व में विख्यात है|बीकानेर राजघरानों की माँ करणीमाता को कुल देवी के रूप पुजते है|वाहा के राजा-महाराज कोई भी शुभारंभ करने से पहले माँकरणी का आशीर्वाद लेकर आगे बढते थे|यहाँ पर देश-विदेश से श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है|यह एक चमत्कारी मंन्दिर है यहाँ पर कोई भी दशर्न करके अपने आप को भाग्यशाली समझता हैं|यहाँ पर सफेद चुहे का दर्शन होना ही आदमी खुद को तकदीर वाला मानता है एसी जनमानस की भावना है|यहां पर चुहो को काबा बोलते है| जब कभी समय मिला तो देशनोक की करणी मात के बारे में यही पर विस्तार से जानकारी दुगी |

1 टिप्पणी:

  1. इस जानकारी को शेयर करने के लिए धन्यवाद....
    कभी उस तरफ जाने का मौक़ा मिला तो जरुर जाना चाहूँगा एक बार..

    उत्तर देंहटाएं